एक बार शाह अकबर के दरबार में बहोत कामकाज चला. लगभग पूरा दिन अकबर को दरबार में ही रहना पड़ा. रात को थक कर शाह अकबर जल्दी सो गए. लेकिन देर रात शाह अकबर को नींद में सपना आया. सपने में शाह अकबर देखते है की उनके मुंह में सिर्फ एक दांत बाकी रहता है और बाकी के सभी दांत गिर जाते है.
सुबह शाह अकबर उठे तो सपने को लेकर चिंतित हो गए. तुरंत उन्होंने राज्य के सभी विद्वान्, सपने का भेद जानने वाले और ज्योतिषियों को दरबार में बुलाया और सभी को अपना सपना कहा. और उन सब से पूछा की इस सपने का अर्थ क्या है ? और क्या इस सपने में मेरे भविष्य के बारे में कोई संकेत है ?
सभी विद्वानों इस विषय पर दरबार में ही गहन चर्चा की और सभी विद्वान् एक निर्णय पर एकमत हो गए. उन्होंने शाह अकबर से कहा की, " आपके इस सपने का अर्थ ये है की आपके इस दुनिया में रहते हुए ही आपके सभी सगे-सम्बन्धी स्वर्ग सीधार जाएंगे "
विद्वानों से अपने सगे - सम्बन्धिओ के बारे में जवाब सुनकर शाह अकबर क्रोधित हो गए और सभी विद्वानों को राजमहल से बाहर निकलने का आदेश दिया.
जब शाह अकबर का गुस्सा ठंडा पड़ा तो उन्हें याद आया की क्यों इस मामले में बीरबल की राय पूछी जाए. लिहाजा शाह अकबर ने बीरबल से अपने सपने के बारे में पूछा.
चूँकि जब विद्वानोंने शाह अकबर के सपने का अर्थ बताया और अकबर उनपर क्रोधित हो गए थे और इस घटना के वक्त बीरबल भी वहां उपस्थित थे. इसलिए बीरबल ने इस मामले में अकबर को चतुराई से जवाब देना ही उचित समजा.
बीरबल ने शाह अकबर से कहा, " जहाँपनाह, ये सपना तो आपके लिए बहोत ही शुभ है. इस सपने से ये अर्थ निकलता है की आप अपने खानदान और कबीले में सबसे ज्यादा जीवन जिओगे. "
बीरबल के इस जवाब से शाह अकबर खुश हुए और बीरबल को पुरस्कार भी दिया.
सार : इस कहानी से हमे या शिक्षा मिलती है की एक जैसी ही बात क्यों न हो पर उसे सही और मीठे अंदाज में कहा जाए तो उसकी किंमत बढ़ जाती है.



