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Thursday, July 30, 2020

अकबर का सपना - (अकबर बीरबल के मजेदार किस्से)



एक बार शाह अकबर के दरबार में बहोत कामकाज चला. लगभग पूरा दिन अकबर को दरबार में ही रहना पड़ा. रात को थक कर शाह अकबर जल्दी सो गए. लेकिन देर रात शाह अकबर को नींद में सपना आया. सपने में शाह अकबर देखते है की उनके मुंह में सिर्फ एक दांत बाकी रहता है और बाकी के सभी दांत गिर जाते है. 

सुबह शाह अकबर उठे तो सपने को लेकर चिंतित हो गए. तुरंत उन्होंने राज्य के सभी विद्वान्, सपने का भेद जानने वाले और ज्योतिषियों को दरबार में बुलाया और सभी को अपना सपना कहा. और उन सब से पूछा की इस सपने का अर्थ क्या है ? और क्या इस सपने में मेरे भविष्य के बारे में कोई संकेत है ?

सभी विद्वानों इस विषय पर दरबार में ही गहन चर्चा की और सभी विद्वान् एक निर्णय पर एकमत हो गए. उन्होंने शाह अकबर से कहा की, " आपके इस सपने का अर्थ ये है की आपके इस दुनिया में रहते हुए ही आपके सभी सगे-सम्बन्धी स्वर्ग सीधार जाएंगे " 

विद्वानों से अपने सगे - सम्बन्धिओ के बारे में जवाब सुनकर शाह अकबर क्रोधित हो गए और सभी विद्वानों को राजमहल से बाहर निकलने का आदेश दिया. 

जब शाह अकबर का गुस्सा ठंडा पड़ा तो उन्हें याद आया की क्यों इस मामले में बीरबल की राय पूछी जाए. लिहाजा शाह अकबर ने बीरबल से अपने सपने के बारे में पूछा. 

चूँकि जब विद्वानोंने शाह अकबर के सपने का अर्थ बताया और अकबर उनपर क्रोधित हो गए थे और इस घटना के वक्त बीरबल भी वहां उपस्थित थे. इसलिए बीरबल ने इस मामले में अकबर को चतुराई से जवाब देना ही उचित समजा. 

बीरबल ने शाह अकबर से कहा, " जहाँपनाह, ये सपना तो आपके लिए बहोत ही शुभ है. इस सपने से ये अर्थ निकलता है की आप अपने खानदान और कबीले में सबसे ज्यादा जीवन जिओगे. " 

बीरबल के इस जवाब से शाह अकबर खुश हुए और बीरबल को पुरस्कार भी दिया. 

सार : इस कहानी से हमे या शिक्षा मिलती है की एक जैसी ही बात क्यों न हो पर उसे सही और मीठे अंदाज में कहा जाए तो उसकी किंमत बढ़ जाती है. 

Tuesday, July 28, 2020

पैसो की थैली - (अकबर बीरबल के मजेदार किस्से)


एक बार शाह अकबर के दरबार भरा हुआ था और दरबार का कामकाज चल रहा था. उतने में शहर का एक नामी तेल का व्यापारी दरबार में अपनी शिकायत लेकर आया उसके साथ एक कसाई भी था. 

व्यापारी ने शाह अकबर को अपनी शिकायत बताते हुए कहा, " जहाँपनाह, शहर में मेरी तेल की दुकान है और आज मैं अपनी दुकान पर बैठकर व्यापार कर रहा था तब यह कसाई मेरी दुकान पर तेल खरीदने के लिए आया और तेल खरीद कर चलाया गया. बाद में जब मैंने देखा तो मेरी पैसो से भरी थैली दुकान से गायब थी. चूँकि मेरी दुकान पर आखरी ग्राहक ये कसाई ही था इसलिए मुझे इस पर संदेह गया की उसने मेरी पैसो की थैली चुराई होगी. इसलिए मैं जब उसके घर पहुंचा तो उसके हाथ में मेरी वो ही पैसो की थैली देखी जो दुकान से गायब हुई थी. लेकिन अब जब मैं इस कसाई से अपनी पैसो की थैली वापस मांग रहा हूँ तो ये देने से इंकार कर रहा है "

तेल के व्यापारी ने अपना पक्ष रख दिया तो शाह अकबर ने कसाई की तरफ देखा. कसाई ने भी शाह अकबर को अपनी बात बताते हुए कहा, " जहाँपनाह, ये सच है की मैं इस तेल के व्यापारी की दुकान पर तेल खरीदने के लिए गया था लेकिन मैंने उसकी थैली नहीं चुराई है बल्कि ये थैली मेरी खुद की ही है और इसमें रखे हुए पैसे भी मेरे है " 

शाह अकबर दोनों की बात सुनकर विचार में पड गए. क्योंकि दोनों की बातों पर विश्वास किया जाए तो भी सही चोर को पकड़ना बहोत मुश्किल था. ऐसे में अकबर ने इस मामले में बीरबल को हस्तक्षेप करने को कहा. 

बीरबल ने पैसो की थैली अपने पास रख ली और कसाई तथा तेल के व्यापारी दोनों को एक दिन बाद दरबार में आने के लिए कहा. 

उन दोनों के जाने के बाद बीरबल ने थैली से पैसे निकाले और सूंघने लगे. सूंघने के बाद सभी पैसे फिर से थैली में रख दिए. अगले दिन जब फिर से दोनों शख्स दरबार में आए तो बीरबल ने शाह अकबर के की हाजरी में सही चोर की पहचान बताते हुए कहा, " जहाँपनाह, थैली और थैली में रखे हुए पैसे असल में कसाई के है और यह तेल का व्यापारी का दावा झूठा है. मैंने थैली में रखे हुए पैसो को सुंघा तो उसमे से कुछ गंध सी आ रही थी जैसी की इस कसाई के कपड़ो से आ रही है. लिहाजा अगर ये पैसे तेल के व्यापारी के होते तो उसमे से तेल की गंध जरूर आती. "

तेल का व्यापारी अपनी भूल पकड़े जाने पर झटपटाने और चिल्लाने लगा तो बीरबल ने सिपाहीओं को आदेश दिया की इसे कैद कर लिया जाए. 

Monday, July 27, 2020

ऊंट की गर्दन - (अकबर बीरबल के मजेदार किस्से)


शाह अकबर के दरबार में जब बीरबल की उपस्तिथि होती तो माहौल बड़ा ही मजेदार बन जाता। एक दिन जब अकबर का दरबार भरा हुआ था तब अकबर ने बीरबल से कोई कठिन प्रश्न पूछ लिया। 

अकबर का प्रश्न इतना कठिन था कि सारे दरबारी भी सन्न रह गए। और मानने लगे कि इस बार बुरे फंसे बीरबल। 

लेकिन हमेंशा की तरह बीरबल ने अपनी सतेज बुद्धि का उपयोग करते हुए शालीनता पूर्वक सवाल का जवाब पेश किया। 

बीरबल का जवाब सुनकर शाह अकबर बेहद खुश हुए और बीरबल को भरे दरबार में पुरस्कार देने का एलान कर दिया। 

अकबर ने एलान तो कर दिया लेकिन उस दिन बातों में इतने मशगूल हो गए कि बीरबल को पुरस्कार देना ही भूल गए। 

इस बात को कई दिन गुजर गए लेकिन बीरबल को ना ही पुरस्कार मिला और ना ही पुरस्कार की राशी। बीरबल शाह अकबर को अपना वादा याद तो दिलाना चाहते थे लेकिन इतनी हिम्मत वो न कर पाए। 

अतः बीरबल ने सोचा की योग्य समय आने पर वे अकबर को अपना वादा याद दिलाकर ही रहेंगे। 

ऐसे में एक दिन शाह अकबर और बीरबल दोनों साथ में नगर में घूमने के लिए निकले। रास्ते पर चलते चलते शाह अकबर की नजर एक ऊंट पर पड़ी। 

ऊंट को देखकर शाह अकबर के मन में एक सवाल उठा। उन्होंने तुरंत वो सवाल बीरबल से पूछते हुए कहा, " बीरबल, हम जब नगर में घूमने निकलते है तो सभी नगरजन हमारी तरफ देखते है लेकिन वो ऊंट हमारी तरफ नही देख और दूसरी तरफ गर्दन मोड़ कर खड़ा है ऐसा क्यों ? "

बीरबल ने ऐसे ही मौके की तलाश में थे। बीरबल ने जट से उत्तर दिया, " जहाँपनाह, ऐसा इसलिए क्योंकि ये ऊंट भी किसी को वादा कर के उस वादे को भूल गया होगा, वादा भूलने की सजा के रूप में उसकी गर्दन मुड़ी हुई है "

ये सुनते ही शाह अकबर को अपना वादा याद आ गया और बीरबल को जल्दी से राजमहल लौटने को कहा। राजमहल पहुंचते ही अकबर ने बीरबल को अपने वादे के मुताबिक पुरस्कार दे दिया। 

व्यापारी बने चौकीदार - (अकबर बीरबल के मजेदार किस्से)


शाह अकबर के राज्य में अचानक से चोरियां होने लगी. दिन के उजाले में तो पुरे शहर में शांति और अमन का माहौल रहता लेकिन जब रात होती तो नगर में चोर अपने करतब दिखा जाते और सुबह कहीं न कहीं चोरी का मामला सामने आ जाता. शहर के सभी बड़े व्यापारी और सेठों ने चोरी की ये शिकायत जब शाह अकबर को कही तो उन्होंने रात को चौकीदारी के लिए नियुक्त किए गए सिपाहीओं को दरबार में बुलाया और उन सभी को सजा के रूप में अपने पद से निलंबित कर दिया. 

साथ ही उन्होंने चोरी की शिकायत करने आए सभी बड़े व्यापारी और सेठों को ये आदेश किया की अब से नगर में चौकीदारी की जिम्मेदारी सभी सेठ और व्यापारी लोग खुद करेंगे और रात को गश्त भी लगाएंगे. 

अब सभी व्यापारी और सेठ भी बुरे फंसे और आपस में कहने लगे की ये कैसा न्याय हुआ हम अपनी चोरी की शिकायत लेकर आए थे और शाह अकबर खुद हमें चौकीदार बना रहे है. 

चूँकि शाह अकबर का आदेश था इसलिए उस वक्त किसी भी सेठ की ये हिम्मत न हुई की अकबर के आदेश के सामने अपनी बात रखें. उस वक्त तो सभी व्यापारी और सेठ वहां से चले गए. 

लेकिन उन्हें मालूम था की यदि बीरबल इस मामले में हस्तक्षेप करे तो उन्हें सही न्याय मिल सकता है. आख़िरकार सभी व्यापारी और सेठ बीरबल के घर जा पहुंचे और उन्हें अपना किस्सा और शाह अकबर का अजब फरमान सुनाया. 

बीरबल ने उनकी बात सुनकर कहा, " ठीक है, तुम्हे आज की रात के लिए तो नगर में गश्त के लिए निकलना पड़ेगा लेकिन उस वक्त तुम सभी अपनी पगड़ियां अपने पैरो पर बांध लेना और और अपने कुर्ते माथे पर ढँक लेना, और ये चिल्लाते हुए निकलना की अब तो आन पड़ी है ... "

सभी सेठ व्यापारी ने इसी तरह का काम करने के लिए हामी भरी और उसी रात वैसा ही वेश धारण करते हुए नगर में निकले. और साथ में चिल्ला चिल्ला कर ये भी कहते जाते थे की ".. अब तो आन पड़ी है ......"

उस रात शाह अकबर भी वेश बदलकर नगर में निकले और व्यापारिओं और सेठों का ये अजब गजब हुलिया देखकर उनसे पूछा की ये क्या है. 

बीरबल के मार्गदर्शन के मुताबिक व्यापारिओं को पता चल गया की ये शाह अकबर ही है और उन्होंने शाह अकबर से कहा की, " जहाँपनाह, उस वक्त तो आपसे कहने की हमारी हिम्मत न हुई, परंतु वास्तव में हम व्यापारी लोग बचपन से ही व्यापार करना जानते है चौकीदारी करना हमारा काम नहीं है इसलिए आपको ये जताने के लिए हमने ये हुलिया बनाया है. "

वहीँ छुपकर ये देख रहे बीरबल भी सामने आए और शाह अकबर से कहने लगे की ये लोग चौकीदारी का काम नहीं कर सकते बल्कि आप अपना आदेश वापिस ले लें तो मैं शहर में होने वाली चोरियों के बारे में बेहतर हल जनता हूँ. "

शाह अकबर हंस पड़े और अपना आदेश वापिस ले लिया और बीरबल की सलाह के मुताबिक रात को पहले से तीन गुना ज्यादा सिपाहियों को रात में चौकीदारी करने के लिए नियुक्त किया. इस उपाय से अगले दिन से ही राज्य में चोरी के मामले बंद हो गए. 

लालची दुकानदार - (अकबर बीरबल के मजेदार किस्से)


शाह अकबर के राज्य में एक लालची दुकानदार भी रहता था। उसकी बर्तनों की दुकान थी और उसके यहां बर्तनों की बिक्री भी अच्छी खासी होती थी लेकिन फिर भी वो अपनी लालच नही छोड़ पाता था। 

अपने यहां आने वाले ग्राहको को वो हल्की गुणवत्ता के बर्तन देकर ऊंची किंमत वसूल करता था। और ग्राहकों को किसी न किसी मजबूरी के कारण उसे ऊंची किंमत देनी पड़ती थी। 

जब इस दुकानदार का लालचीपन हद से बढ़ गया तो कुछ लोगो ने इसकी शिकायत बीरबल से की। बीरबल ने उनकी फरियाद सुनकर कुछ दिन तक इंतजार करने का आश्वासन दिया। 

फिर एक दिन बीरबल खुद उस दुकानदार की दुकान पर गए और वहां से तीन बड़े पतीले खरीदे। चार पांच दिन के बाद बीरबल एक छोटी पतीली लेकर फिऱ उस दुकानदार के पास गए और दुकानदार से कहा, " ये लीजिए, मैं आपके पास जो पतीले ले गया था उसने इस पतीली को जन्म दिया है, इसे आप रख लीजिए "

दुकानदार ने अपनी लालच को बरकरार रखते हुए बीरबल से वो पतीली ले ली। 

फिर चार - पांच दिन गुजरे की बीरबल फिर उस दुकानदार के पास गए और इस बार अपने साथ उन तीन बड़े पतीलों में से एक पतीला भी ले गए जो उन्होंने दुकानदार से खरीदे थे। 

दुकान पर जाकर बीरबल ने कहा, " मुजे आपके पतीले नही पसंद आप इसे वापस रख लीजिए और मेरे पैसे वापस दे दीजिए "

दुकानदार ने कहा, " लेकिन मैंने तो तुम्हे तीन पतीले बेचे थे। बाकी के दो पतीले कहाँ है ? "

बीरबल ने कहा, " वो दो पतीलों की तो मृत्यु हो गई "

दुकानदार बोला, " ये क्या मजाक है, भला कभी पतीले की भी मृत्यु होती है ? "

बीरबल ने जवाब दिया, " क्यों नही, जब पतीले पतीली को जन्म दे सकते है तो पतीले की मृत्यु भी हो सकती है "

बीरबल का जवाब सुनकर दुकानदार सन्न रह गया और उसे अपनी गलती का एहसास हो गया। उसने बीरबल से कहा कि अब वो अपना लालची स्वभाव छोड़ कर ईमानदारी से व्यापार करेगा।

बीरबल को बुद्धि कहाँ से प्राप्त हुई - (अकबर बीरबल के मजेदार किस्से)


शाह अकबर और बीरबल जब दरबार में हो तो माहौल।बडा ही रौनक भरा हो जाता। शाह अकबर के साथ साथ दरबार में उपस्थित अन्य दरबारियों को भी ज्ञानप्रद बातें जानने को मिलती। 

दूसरी ओर शाह अकबर भी समय समय पर बीरबल की परीक्षा लेने के लिए तरह तरह के अजब गजब सवाल पूछते। और उन सवालों का जवाब बीरबल शालीनता और बुध्धि से देकर सभी का दिल जीत लेते। 

ऐसे ही एक दिन जब दरबार भरा हुआ था तो शाह अकबर ने बीरबल से पूछा, " बताओ बीरबल, तुम्हारे पास इतनी तेज बुध्धि कहाँ से आई " 

बीरबल तो बुद्धिमान थे ही। उन्होंने एक पल का भी इंतेजार किए बिना शाह अकबर को जवाब दिया, " जहाँपनाह, मुजे ये बुध्धि मूर्खों से प्राप्त हुई है " 

बीरबल का जवाब सुनकर शाह अकबर अचंभित रह गए। क्योंकि बीरबल के जवाब ने उन्हें और उलझा दिया। है अकबर बोले, " भला मूर्खों से कैसे बुध्दि मिल सकती है ? उनके पास अगर बुध्धि होती तो वो थोड़े ही मूर्ख कहलाते ? और जिसके पास जो होता है वो ही वो दे सकता है। तो अगर मूर्खों के पास बुध्धि है ही नही तो तुम्हे उनसे बुध्धि कैसे प्राप्त हुई ? "

बीरबल ने कहा, " आपने सही कहा जहाँपनाह, लेकिन मैं खुद को उन कामो से रोकता रहा जो काम मूर्ख लोग करते है और इसलिए मेरी बुध्धि सतेज होती गई। इस तरीके से देखा जाए तो मुजे मूर्खों से बुध्धि प्राप्त हुई है "

बीरबल का जवाब सुनकर शाह अकबर को भी मानना पड़ा कि बीरबल की परीक्षा लेना कठिन काम है। 

Thursday, July 23, 2020

सबसे बड़ी चीज - (अकबर बीरबल के मजेदार किस्से)



शाह अकबर के दरबार में यूँ तो सभी दरबारी मिलजुल कर रहते थे लेकिन कुछ दरबारी ऐसे भी थे जिसको शाह के दरबार में बीरबल का ऊँचा स्थान हजम नहीं होता था. लेकिन बीरबल की हाजरी में वो शाह अकबर से उसकी शिकायत नहीं कर पाते थे और मन ही मन इर्षा से जल रहे थे. 

ऐसे में एक मौका ऐसा आया की बीरबल पांच दिनों के लिए दूसरे राज्य में अपने किसी संबंधी के घर गए और शाह अकबर के दरबार में पांच दिन के लिए बीरबल की मौजूदगी नहीं थी. इसका लाभ बीरबल के ईर्षालु दरबारी ने उठाना चाहा और उन्होंने शाह अकबर के कान भरना शुरू कर दिया. 

चार ईर्षालु दरबारियों की एक टोली ने शाह अकबर से कहा, " जहाँपनाह, आपने खांमखा बीरबल को सर पे चढ़ा रखा है और इससे वो घमंडी होते जा रहे है. हांलाकि जो काम बीरबल करते है वो हम चारों को भी आता है. "

शाह अकबर ने उन्हें जवाब दिया, " क्या वाकई ?, अगर तुम्हारा दावा सच्चा है तो मैं तुम चारों से एक सवाल करता हूँ, अगर तुम सही जवाब नहीं दे पाए तो मैं तुम चारों को फांसी पर चढ़ा दूंगा "

चारों ने हामी भरी और शाह अकबर ने उनसे सवाल पूछा के " दुनिया की सबसे बड़ी चीज कौन सी है ? "

चारों दरबारियों ने शाह अकबर से जवाब के लिए एक हफ्ते का समय माँगा. शाह अकबर ने उसे एक सप्ताह का वक्त दीया और कहा की आठवें दिन जवाब नहीं मिला तो फांसी के लिए तैयार रहना. 

पांच दिन गुजरने तक चारों में से किसी को भी सवाल का जवाब नहीं मिल पाया. वहीँ बीरबल भी अपने संबंधी के घर से अपने शहर वापीस आ चुके थे. अंत में चारों ने बीरबल की मदद मांगने का फैसला किया. और बीरबल को मिलकर सारी बात कही. 

बीरबल ने उनसे कहा की वो उन चारों को फांसी से बचा लेगा बशर्ते वो उसकी शर्त मानें. चारों शर्त मानने के लिए तैयार हो गए. और शर्त के मुताबिक चारों ने एक चारपाई पर बीरबल को बिठाया और उसको अपने कंधो पर उठाया. साथ ही एक दरबारी ने हाथ में बीरबल के जूते उठाए. और इसी चारपाई के साथ शाह अकबर के दरबार में पेश हुए. 

वहां पहुंचकर बीरबल ने शाह अकबर से कहा, " जहाँपनाह, दुनिया में सबसे बड़ी चीज गरज है, अगर गरज है तो लोग न करने का काम करने के लिए भी मजबूर हो जाते है. ये चारों की गरज ही है जो मुझे यहाँ इस तरह लाए है. आपसे निवेदन है की इन चारों को फांसी न दी जाए और माफ़ कर दिया जाए. "

शाह अकबर ने बीरबल का मान रखते हुए चारों दरबारी को माफ़ किया और आगे ऐसी गुस्ताखी न करने की नसीहत दी. 



चूड़ियों की संख्या - (अकबर बीरबल के मजेदार किस्से)



एक बार शाह अकबर के दरबार में आनंद का माहौल था. और शाह अकबर का मूड भी मजाकिया था. मजाक - मजाक में शाह अकबर ने बीरबल की परीक्षा लेने की सोची. 

कुछ देर तक सोचने के बाद शाह अकबर से सवाल किया, " बताओ, बीरबल हमारी बेगम अपने दोनों हाथों में कितनी चूड़ियां पहनती है ? "

अब बीरबल के लिए भी ये मुश्किल घडी आ पड़ी थी. क्योंकि सवाल परीक्षा लेने के लिए पूछा गया है ये बीरबल भांप गए. लेकिन इसका जवाब देने के बदले उन्होंने शाह अकबर से कहा, " जहाँपनाह, ये तो मैं नहीं जानता "

बीरबल से अपेक्षाकृत जवाब ना मिलने पर शाह अकबर यकायक गुस्सा हो गए और बीरबल से कहा, " ये क्या बात हुई ? आप रोज इस महल में आते हो और हमारी बेगम की चूड़ियां कितनी है वो भी नहीं पता ? "

बीरबल ने जवाब देने के बजाय खामोश रहकर परिस्तिथि को शांत रखा. 

अगले दिन जब शाह अकबर और बीरबल शाही बगीचे में घूमने के लिए निकल ही रहे थे की बीरबल ने शाह अकबर से पूछा, " जहाँपनाह, क्या आपको पता है शाही बगीचे के पेड़ो में कितनी पत्तियां है ? और आप रोज इस बगीचे में घूमने जाते है और रोज पेड़ो की पत्तियों को भी देखते है. इसलिए आपको पत्तियों की संख्या मालूम ही होगी ? "

शाह अकबर को यह सुनकर तुरंत अपनी गलती का एहसास हुआ और वो बीरबल के सामने देखते हुए हंस पड़े. 

Wednesday, July 22, 2020

चोर की पहचान - (अकबर बीरबल के मजेदार किस्से)



एक बार शाह अकबर के शहर में एक बड़े व्यापारी के घर में चोरी हो गई. चोर ने व्यापारी का किंमती मालसामान चुरा लिया था. व्यापारी का कारोबार बड़ा था इसलिए उसने घर और दुकान में कई नौकर भी रखे थे. यूँ तो व्यापारी को पक्का यकीन था की चोर उसीके किसी एक नौकर ने ही की है. लेकिन कोई भी चोरी कबूलने के लिए तैयार नहीं था. 

व्यापारी ने आख़िरकार इस मामले में बीरबल से मदद मांगी. बीरबल ने पूरी बात सुनकर व्यापारी के सभी नौकरों को बुलवाया और सबको अलग अलग कोटरी में बंद करवा दिया. कुछ समय बाद बीरबल ने सभी नौकरो को एक एक लकड़ी दी और सभी को कहा की ये जादुई लकड़ी है जिस व्यक्तिने चोरी की होगी उसकी लकड़ी कल सुबह दो इंच बड़ी हो जाएगी

सुबह हुई तो बीरबल और व्यापारी कैद किए गए सभी नौकरो की कोटरी में गए और सभी की लकड़ियां नापी. बीरबल ने देखा की एक नौकर की लकड़ी दो इंच तक छोटी हो गई थी. 

बीरबल ने सैनिको से कहा की ये ही चोर है और इसी ने व्यापारी का माल-सामान चुराया है इसे कैद कर लिया जाए. बाद में चोर ने भी कबूल किया की वाकई में उसीने चोरी की थी. 

व्यापारी को ये देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ की बीरबल ने आखिर चोर को पकड़ा कैसे ? इस बारे में बीरबल से पूछने पर उसने व्यापारी को बताया की वास्तव में कोई लकड़ी जादुई नहीं थी बल्कि सामान्य लकड़ी ही थी. जैसे की मैंने कहा की कल सुबह जो चोर होगा उसकी लकड़ी दो इंच बड़ी हो जाएगी. 

जिसने चोरी नहीं की थी वो निश्चिन्त रहे लेकिन चोर ने इसी डर से की वो पकड़ा न जाए अपनी लकड़ी को दो इंच तक काट दिया. और इसी भूल की वजह से उसकी लकड़ी सभी से दो इंच छोटी हो गई और हम चोर को पकड़ पाए. 

बीरबल की बुद्धिचातुर्य की व्यापारी ने भी तारीफ की. 

Monday, July 20, 2020

बुद्धि से भरा मटका - (अकबर बीरबल के मजेदार किस्से)



बुद्धि से भरा हुआ मटका : अकबर बीरबल का ये किस्सा भी बड़ा दिलचस्प है जिसका शीर्षक है " बुद्धि से भरा हुआ मटका " 

एक बार किसी कारणवश अकबर और बीरबल में तनातनी छिड़ गई। शाह अकबर भी अपने गुस्से को काबू में ना रख पाए और बीरबल भी अपने गुस्से को काबू में।ना रख पाए। और गुस्से में अकबर ने बीरबल से कह दिया कि वो शहर से ही निकल जाए। 

दूसरी तरफ बीरबल का गुस्सा भी सातवें आसमान पर था। बीरबल ने अकबर का आदेश मानते हुए शहर छोड़ दिया और किसी दूसरे शहर में चले गए। 

वहां बीरबल एक सामान्य किसान के खेत में बतौर मजदूर काम करने लगे। थोड़े दिनों के बाद बीरबल को अपना घर याद आने लगा। वहीं दूसरी ओर अकबर के दरबार में भी सन्नाटा छा गया था और खुद बीरबल भी उसकी कमी महसूस कर रहे थे। 

आखिरकार बीरबल को अपनी गलती का एहसास हुआ। और बीरबल को वापस लाने के लिए उसकी खोज करवाई। लेकिन कहीं से भी बीरबल का अता पता ना मिला। 

आखिर अकबर ने आसपास के सभी गांवों के मुखिया को ये संदेश भिजवाया को वो एक महीने के अंदर बुद्धि से भरा हुआ मटका अथवा हिरे-जवाहरातों से भरा हुआ मटका शाह अकबर के दरबार में पेश करें।

शाह अकबर का यह आदेश सुनकर सभी गांवों के मुखिया परेशान हो गए। वहीं बीरबल के गांव में भी इस खबर को लेकर चर्चा होने लगी। जब बीरबल को इस आदेश के बारे में पता चला तो वो गांव के मुखिया के पास गया और उसे आश्वासन दिया और कहा कि वो एक खाली मटका उसे दें और वो एक महीने में उसे बुद्धि से भरकर वापस देंगे। 

बीरबल ने मुखिया के खाली मटके को अपने खेत में लाए और उसमें तरबूज की बेल का एक सिरा अंदर डाल दिया जिस बेल में छोटा सा तरबूज उग निकला था। 

अब बीरबल उस तरबूज की बेल का अच्छी तरह से ख्याल रखने लगे। ठीक एक महीने बाद देखने पर मटके में बेल के जिस सिरे को डाला गया था उसमें एक बड़ा सा तरबूज उग गया था। वो इतना बड़ा हो गया था कि उसे मटके को तोडे बगैर निकालना नामुमकिन था। 

बीरबल ने बेल को काटकर तरबूज भरे उस मटके को मुखिया के जरिए शाह अकबर तक पहुंचाया और साथ में ये संदेश भी दिया कि मटके से बुद्धि निकालकर खाली मटका वापिस भेजें।

अकबर ने जब यह मटका देखा तो उसे ये समझने में देर नही लगी कि ये बीरबल के बुद्धिचातुर्य का ही परिणाम है। 

शाह अकबर ने उस गांव के मुखिया को खबर कर बीरबल को वापिस अपने दरबार में बुलवा लिया और अपनी गलती को भी मान लिया। 

तोता मर गया - (अकबर बीरबल के मजेदार किस्से)



शाह अकबर के राज्य में एक आदमी था जो तोते पालने का बड़ा शौक़ीन था. उसके पास एक ऐसा तोता भी था जो इंसानो की भाषा बोलने और समझने लगा था. उस आदमी ने सोचा की क्यों न इस तोते को शाह अकबर को दिखाया जाए. 

एक दिन वो अपना तोता लेकर शाह अकबर के दरबार में गया. उसने अकबर को कहा की उसका तोता इंसानो की भाषा समझता और बोलता है. शाह अकबर ने कहने पर उस आदमी ने अपने तोते से कहा, " बताओ, ये किसका दरबार है ? " 

तोते ने कहा, " ये शाह अकबर का दरबार है " 

तोते का जवाब सुनकर शाह अकबर खुश हुए और तोते के मालिक से कहा की वो इस तोते को खरीदना चाहते है इसकी किंमत क्या लोगे ?

आदमी ने जवाब दिया जो शाह अकबर ठीक समझे वो ही उसकी किंमत होगी. अकबर ने उस आदमी को हिरे - जवाहरात देकर वो तोता खरीद लिया. साथ ही अकबर ने एक दरबारी को इस तोते की देखभाल करने की जिम्मेदारी सौपी. और कहा की इस तोते का खास ख्याल रखा जाए. अगर किसी ने इस तोते की मौत की खबर दी तो उसे फांसी पर चढ़ा दिया जाएगा. 

डर के मारे दरबारी अपने से ज्यादा तोते का ख्याल रखने लगे. कुछ दिनों तक यूँ चलता रहा फिर एक दिन तोता मर गया. अब जिस दरबारी को तोते की देखभाल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी उसकी तो मानो सामत आ गई. वो सोचने लगा की अगर वो शाह अकबर को बताएगा की तोता मर गया है तो शाह अकबर उसको ही फांसी की सजा दे देंगे. 

समस्या का कोई समाधान न दिखने पर उसने इस बारे में बीरबल से चर्चा की. बीरबल ने उसे कहा की वो निश्चिंत रहे तोते के मरने की खबर वो खुद शाह अकबर को बता देंगे. 

बीरबल ने दरबार में जाकर शाह अकबर से कहा, " जहाँपनाह, आपका तोता कुछ खा नहीं रहा "

शाह अकबर : " ये तुम क्या कह रहे हो ? उसे क्या हुआ ? "

बीरबल : " जी हाँ, जहाँपनाह, आपका तोता खाना भी नहीं खा रहा, पानी भी नहीं पी रहा और उसकी सांसे भी नहीं चल रही "

अकबर : " तो मतलब मेरा तोता मर गया ? "

बीरबल : " ये मै अपने मुंह से नहीं बोला जहाँपनाह, बल्कि आपने खुद ही कहा है की तोता मर गया.. " 

शाह अकबर को बात समझ में आ गई की तोते के मरने की खबर देने की किसी में हिम्मत नहीं थी इसलिए बीरबल ने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल कर के ये खबर मुझे इस तरीके से दी.