Labels

Monday, July 27, 2020

ऊंट की गर्दन - (अकबर बीरबल के मजेदार किस्से)


शाह अकबर के दरबार में जब बीरबल की उपस्तिथि होती तो माहौल बड़ा ही मजेदार बन जाता। एक दिन जब अकबर का दरबार भरा हुआ था तब अकबर ने बीरबल से कोई कठिन प्रश्न पूछ लिया। 

अकबर का प्रश्न इतना कठिन था कि सारे दरबारी भी सन्न रह गए। और मानने लगे कि इस बार बुरे फंसे बीरबल। 

लेकिन हमेंशा की तरह बीरबल ने अपनी सतेज बुद्धि का उपयोग करते हुए शालीनता पूर्वक सवाल का जवाब पेश किया। 

बीरबल का जवाब सुनकर शाह अकबर बेहद खुश हुए और बीरबल को भरे दरबार में पुरस्कार देने का एलान कर दिया। 

अकबर ने एलान तो कर दिया लेकिन उस दिन बातों में इतने मशगूल हो गए कि बीरबल को पुरस्कार देना ही भूल गए। 

इस बात को कई दिन गुजर गए लेकिन बीरबल को ना ही पुरस्कार मिला और ना ही पुरस्कार की राशी। बीरबल शाह अकबर को अपना वादा याद तो दिलाना चाहते थे लेकिन इतनी हिम्मत वो न कर पाए। 

अतः बीरबल ने सोचा की योग्य समय आने पर वे अकबर को अपना वादा याद दिलाकर ही रहेंगे। 

ऐसे में एक दिन शाह अकबर और बीरबल दोनों साथ में नगर में घूमने के लिए निकले। रास्ते पर चलते चलते शाह अकबर की नजर एक ऊंट पर पड़ी। 

ऊंट को देखकर शाह अकबर के मन में एक सवाल उठा। उन्होंने तुरंत वो सवाल बीरबल से पूछते हुए कहा, " बीरबल, हम जब नगर में घूमने निकलते है तो सभी नगरजन हमारी तरफ देखते है लेकिन वो ऊंट हमारी तरफ नही देख और दूसरी तरफ गर्दन मोड़ कर खड़ा है ऐसा क्यों ? "

बीरबल ने ऐसे ही मौके की तलाश में थे। बीरबल ने जट से उत्तर दिया, " जहाँपनाह, ऐसा इसलिए क्योंकि ये ऊंट भी किसी को वादा कर के उस वादे को भूल गया होगा, वादा भूलने की सजा के रूप में उसकी गर्दन मुड़ी हुई है "

ये सुनते ही शाह अकबर को अपना वादा याद आ गया और बीरबल को जल्दी से राजमहल लौटने को कहा। राजमहल पहुंचते ही अकबर ने बीरबल को अपने वादे के मुताबिक पुरस्कार दे दिया। 

No comments:

Post a Comment