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Monday, July 20, 2020

तोता मर गया - (अकबर बीरबल के मजेदार किस्से)



शाह अकबर के राज्य में एक आदमी था जो तोते पालने का बड़ा शौक़ीन था. उसके पास एक ऐसा तोता भी था जो इंसानो की भाषा बोलने और समझने लगा था. उस आदमी ने सोचा की क्यों न इस तोते को शाह अकबर को दिखाया जाए. 

एक दिन वो अपना तोता लेकर शाह अकबर के दरबार में गया. उसने अकबर को कहा की उसका तोता इंसानो की भाषा समझता और बोलता है. शाह अकबर ने कहने पर उस आदमी ने अपने तोते से कहा, " बताओ, ये किसका दरबार है ? " 

तोते ने कहा, " ये शाह अकबर का दरबार है " 

तोते का जवाब सुनकर शाह अकबर खुश हुए और तोते के मालिक से कहा की वो इस तोते को खरीदना चाहते है इसकी किंमत क्या लोगे ?

आदमी ने जवाब दिया जो शाह अकबर ठीक समझे वो ही उसकी किंमत होगी. अकबर ने उस आदमी को हिरे - जवाहरात देकर वो तोता खरीद लिया. साथ ही अकबर ने एक दरबारी को इस तोते की देखभाल करने की जिम्मेदारी सौपी. और कहा की इस तोते का खास ख्याल रखा जाए. अगर किसी ने इस तोते की मौत की खबर दी तो उसे फांसी पर चढ़ा दिया जाएगा. 

डर के मारे दरबारी अपने से ज्यादा तोते का ख्याल रखने लगे. कुछ दिनों तक यूँ चलता रहा फिर एक दिन तोता मर गया. अब जिस दरबारी को तोते की देखभाल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी उसकी तो मानो सामत आ गई. वो सोचने लगा की अगर वो शाह अकबर को बताएगा की तोता मर गया है तो शाह अकबर उसको ही फांसी की सजा दे देंगे. 

समस्या का कोई समाधान न दिखने पर उसने इस बारे में बीरबल से चर्चा की. बीरबल ने उसे कहा की वो निश्चिंत रहे तोते के मरने की खबर वो खुद शाह अकबर को बता देंगे. 

बीरबल ने दरबार में जाकर शाह अकबर से कहा, " जहाँपनाह, आपका तोता कुछ खा नहीं रहा "

शाह अकबर : " ये तुम क्या कह रहे हो ? उसे क्या हुआ ? "

बीरबल : " जी हाँ, जहाँपनाह, आपका तोता खाना भी नहीं खा रहा, पानी भी नहीं पी रहा और उसकी सांसे भी नहीं चल रही "

अकबर : " तो मतलब मेरा तोता मर गया ? "

बीरबल : " ये मै अपने मुंह से नहीं बोला जहाँपनाह, बल्कि आपने खुद ही कहा है की तोता मर गया.. " 

शाह अकबर को बात समझ में आ गई की तोते के मरने की खबर देने की किसी में हिम्मत नहीं थी इसलिए बीरबल ने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल कर के ये खबर मुझे इस तरीके से दी. 

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