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Monday, July 20, 2020

बुद्धि से भरा मटका - (अकबर बीरबल के मजेदार किस्से)



बुद्धि से भरा हुआ मटका : अकबर बीरबल का ये किस्सा भी बड़ा दिलचस्प है जिसका शीर्षक है " बुद्धि से भरा हुआ मटका " 

एक बार किसी कारणवश अकबर और बीरबल में तनातनी छिड़ गई। शाह अकबर भी अपने गुस्से को काबू में ना रख पाए और बीरबल भी अपने गुस्से को काबू में।ना रख पाए। और गुस्से में अकबर ने बीरबल से कह दिया कि वो शहर से ही निकल जाए। 

दूसरी तरफ बीरबल का गुस्सा भी सातवें आसमान पर था। बीरबल ने अकबर का आदेश मानते हुए शहर छोड़ दिया और किसी दूसरे शहर में चले गए। 

वहां बीरबल एक सामान्य किसान के खेत में बतौर मजदूर काम करने लगे। थोड़े दिनों के बाद बीरबल को अपना घर याद आने लगा। वहीं दूसरी ओर अकबर के दरबार में भी सन्नाटा छा गया था और खुद बीरबल भी उसकी कमी महसूस कर रहे थे। 

आखिरकार बीरबल को अपनी गलती का एहसास हुआ। और बीरबल को वापस लाने के लिए उसकी खोज करवाई। लेकिन कहीं से भी बीरबल का अता पता ना मिला। 

आखिर अकबर ने आसपास के सभी गांवों के मुखिया को ये संदेश भिजवाया को वो एक महीने के अंदर बुद्धि से भरा हुआ मटका अथवा हिरे-जवाहरातों से भरा हुआ मटका शाह अकबर के दरबार में पेश करें।

शाह अकबर का यह आदेश सुनकर सभी गांवों के मुखिया परेशान हो गए। वहीं बीरबल के गांव में भी इस खबर को लेकर चर्चा होने लगी। जब बीरबल को इस आदेश के बारे में पता चला तो वो गांव के मुखिया के पास गया और उसे आश्वासन दिया और कहा कि वो एक खाली मटका उसे दें और वो एक महीने में उसे बुद्धि से भरकर वापस देंगे। 

बीरबल ने मुखिया के खाली मटके को अपने खेत में लाए और उसमें तरबूज की बेल का एक सिरा अंदर डाल दिया जिस बेल में छोटा सा तरबूज उग निकला था। 

अब बीरबल उस तरबूज की बेल का अच्छी तरह से ख्याल रखने लगे। ठीक एक महीने बाद देखने पर मटके में बेल के जिस सिरे को डाला गया था उसमें एक बड़ा सा तरबूज उग गया था। वो इतना बड़ा हो गया था कि उसे मटके को तोडे बगैर निकालना नामुमकिन था। 

बीरबल ने बेल को काटकर तरबूज भरे उस मटके को मुखिया के जरिए शाह अकबर तक पहुंचाया और साथ में ये संदेश भी दिया कि मटके से बुद्धि निकालकर खाली मटका वापिस भेजें।

अकबर ने जब यह मटका देखा तो उसे ये समझने में देर नही लगी कि ये बीरबल के बुद्धिचातुर्य का ही परिणाम है। 

शाह अकबर ने उस गांव के मुखिया को खबर कर बीरबल को वापिस अपने दरबार में बुलवा लिया और अपनी गलती को भी मान लिया। 

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