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Monday, July 27, 2020

लालची दुकानदार - (अकबर बीरबल के मजेदार किस्से)


शाह अकबर के राज्य में एक लालची दुकानदार भी रहता था। उसकी बर्तनों की दुकान थी और उसके यहां बर्तनों की बिक्री भी अच्छी खासी होती थी लेकिन फिर भी वो अपनी लालच नही छोड़ पाता था। 

अपने यहां आने वाले ग्राहको को वो हल्की गुणवत्ता के बर्तन देकर ऊंची किंमत वसूल करता था। और ग्राहकों को किसी न किसी मजबूरी के कारण उसे ऊंची किंमत देनी पड़ती थी। 

जब इस दुकानदार का लालचीपन हद से बढ़ गया तो कुछ लोगो ने इसकी शिकायत बीरबल से की। बीरबल ने उनकी फरियाद सुनकर कुछ दिन तक इंतजार करने का आश्वासन दिया। 

फिर एक दिन बीरबल खुद उस दुकानदार की दुकान पर गए और वहां से तीन बड़े पतीले खरीदे। चार पांच दिन के बाद बीरबल एक छोटी पतीली लेकर फिऱ उस दुकानदार के पास गए और दुकानदार से कहा, " ये लीजिए, मैं आपके पास जो पतीले ले गया था उसने इस पतीली को जन्म दिया है, इसे आप रख लीजिए "

दुकानदार ने अपनी लालच को बरकरार रखते हुए बीरबल से वो पतीली ले ली। 

फिर चार - पांच दिन गुजरे की बीरबल फिर उस दुकानदार के पास गए और इस बार अपने साथ उन तीन बड़े पतीलों में से एक पतीला भी ले गए जो उन्होंने दुकानदार से खरीदे थे। 

दुकान पर जाकर बीरबल ने कहा, " मुजे आपके पतीले नही पसंद आप इसे वापस रख लीजिए और मेरे पैसे वापस दे दीजिए "

दुकानदार ने कहा, " लेकिन मैंने तो तुम्हे तीन पतीले बेचे थे। बाकी के दो पतीले कहाँ है ? "

बीरबल ने कहा, " वो दो पतीलों की तो मृत्यु हो गई "

दुकानदार बोला, " ये क्या मजाक है, भला कभी पतीले की भी मृत्यु होती है ? "

बीरबल ने जवाब दिया, " क्यों नही, जब पतीले पतीली को जन्म दे सकते है तो पतीले की मृत्यु भी हो सकती है "

बीरबल का जवाब सुनकर दुकानदार सन्न रह गया और उसे अपनी गलती का एहसास हो गया। उसने बीरबल से कहा कि अब वो अपना लालची स्वभाव छोड़ कर ईमानदारी से व्यापार करेगा।

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