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Monday, August 3, 2020

हंसी के कुरकुरे, वो भी मसालेदार - (पार्ट-1)

जिंदगी में हंसना भी जरुरी है. और हंसी अगर अंदर से आए तो सच्ची हसीं है. हा .. हा .. हा ... से दहाड़े मारकर हंसने लगेंगे तो लोग पागल कहेंगे. तो चखिए ये रहे कुछ हंसी के कुरकुरे.. वो भी मसालेदार...

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डॉक्टर : तुम्हारे बहरेपन का इलाज हो गया है अब तुम सब कुछ क्लियर सुन सकोगे. आपके इस इलाज का बिल पांच हजार हुआ है !!

मरीज : जी, क्या कह रहे है डॉक्टर साहब ??

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मम्मी : बेटा राजू, अगले हफ्ते तुम्हारा जन्मदिन है. इस बार तुम किन किन लोगो को बुलाना चाहते हो ?

राजू : दादाजी, मामाजी, चाचाजी, मामीजी और 50 से ज्यादा उम्र वाले वो सभी लोग जो मुझे उपहार में पैसे देंगे. 

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रमेश : यार सुरेश, लैंडलाइन और मोबाईल फोन में क्या फर्क है ?

सुरेश : इसका जवाब तो बिलकुल आसान है, लैंडलाइन में ऊँगली से नंबर घुमाने पड़ते है और मोबाईल में अंगूठे से. 

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एक सज्जन अपनी बीवी के साथ ट्रेन के डिब्बे में जैसे ही बैठे की तुरंत घबराकर बहार निकल आए. किसीने पूछा " क्या हुआ भाई साहब, आप इस तरह बहार क्यों आ गए ? " 

सज्जन : " अंदर लिखा हुआ है की विस्फोटक वस्तु लेकर यात्रा करना अपराध है और मेरी बीवी मेरे साथ है इसलिए. " 

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सर्कस में रिंग मास्टर ने अपने मुंह में ब्रेड का टुकड़ा रखा और शेर को अपनी तरफ आने का इशारा किया. शेर रिंग मास्टर के पास आया और उसके मुंह में से ब्रेड का टुकड़ा निकाल लिया. ये देखकर सुरेश चिल्लाकर..

सुरेश : ये करतब तो बिलकुल आसान है 

रिंग मास्टर : तो क्या आप इस करतब को कर सकते हो ?

सुरेश : क्यों नहीं, शेर कर सकता है तो मैं क्यों नहीं. 

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सुरेश : धरती और चाँद में क्या रिश्ता है ?

रमेश : भाई - बहन का 

सुरेश : वो कैसे ?

रमेश : चाँद को हम चंदामामा कहते है और धरती को माता. 

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