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Tuesday, August 4, 2020

हंसी के कुरकुरे, वो भी मसालेदार - (पार्ट-4)

जिंदगी में हंसना भी जरुरी है. और हंसी अगर अंदर से आए तो सच्ची हसीं है. हा .. हा .. हा ... से दहाड़े मारकर हंसने लगेंगे तो लोग पागल कहेंगे. तो चखिए ये रहे कुछ हंसी के कुरकुरे.. वो भी मसालेदार...

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दुकान में एक सेठ को मच्छर बहोत परेशान कर रहे थे तो उन्होंने अपने रामु नौकर से कहा की गुड़ नाइट जलाएं और मच्छरों को मारे.

सेठ : मैंने तुम्हे कहा था की मच्छरों को मारो, लेकिन ये तो अब भी कान में गुनगुना रहे है ?

नौकर : सेठ जी, मैंने मच्छरों को मार दिया है और आपके कान में तो मच्छरों की विधवा पत्नियां विलाप कर रही है. 

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रमेश : वैसे तो तुम्हारे कुत्ते की किंमत बहुत ज्यादा है फिर मैं इसे खरीदना चाहता हूँ, पर ये वफादार है इसकी क्या गेरेंटी ?

सुरेश : उसकी चिंता मत करिए, मैंने इसे अब तक 10 बार बेच दिया है और हर बार ये मेरे पास वापस आ जाता है. 

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एक ब्यूटी पार्लर के बाहर एक नोटिस बोर्ड लगा हुआ था. जिसमे बड़े अक्षरों में लिखा था की 

" लड़को से निवेदन है की कृपया इस ब्यूटी पार्लर से बाहर आने वाली महिला को सिटी न मारें, क्योंकि वो आपकी दादी, नानी भी हो सकती है. 

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सुरेश के बेटा साइकल चलाते - चलाते एक मोटे आदमी से टकरा गया. मोटे आदमी ने बच्चे पर चिल्लाते हुए कहा.

मोटा आदमी : बाजु से साइकल नहीं चला सकता था क्या ?

बच्चा : बाजु से चलाता तो मुझे एक बड़ा सा चक्कर लगाना पड़ता. 

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रमेश के बेटे चिंटू का जन्मदिन था और जन्मदिन पर उसके दोस्त भी आने वाले थे. 

चिंटू : मम्मी जल्दी से मेरी स्कुल वाली सभी किताबें कहीं छुपाकर रख दें. 

मम्मी : क्यों, तुम्हारे दोस्त किताबे चोरी कर लेंगे क्या ?

चिंटू : नहीं, पर वो अपनी किताबे पहचान जाएंगे. 

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पति हर महीने अपनी पगार पत्नी के हाथ में थमा देता था लेकिन फिर भी पत्नी को पैसो की किल्लत रहती. 

पति : मुझे ये समझ नहीं आ रहा, मैं तुम्हे इतने पैसे देता हु फिर भी तुमको कम क्यों पड़ते है ?

पत्नी : हमारे पड़ोसियों की वजह से. वो महंगी महंगी चीजे खरीदते है और उसको निचा निखाने के लिए मुझे भी उससे महंगी चीज खरीदनी पड़ती है. 

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