जिंदगी में हंसना भी जरुरी है. और हंसी अगर अंदर से आए तो सच्ची हसीं है. हा .. हा .. हा ... से दहाड़े मारकर हंसने लगेंगे तो लोग पागल कहेंगे. तो चखिए ये रहे कुछ हंसी के कुरकुरे.. वो भी मसालेदार...
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एक चाचा शहर के चौक में बैठे थे तभी एक वहां एक युवक आया तो उससे कहने लगे.
चाचा : देख बेटा, शादी पचास साल के बाद ही करनी चाहिए.
युवक : ऐसा क्यों चाचाजी ?
चाचा : इसलिए की अगर पत्नी अच्छी मिले तो इंतजार का फल है और अगर पत्नी बुरी मिले तो हमें उसके साथ ज्यादा जीवन बिताना नहीं पड़ता.
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सुरेश का बेटा गुल्लक में पैसे की जगह घडी डाल रहा था.
सुरेश : बेटा, गुल्लक में घड़ी क्यों डाल रहे हो ?
बेटा : क्या पैसा बचाने के लिए उसे गुल्लक में नहीं डाला जाता ?
सुरेश : हाँ, तो ?
बेटा : ये ही तो, मैं अपना समय बचाना चाहता हूँ इसलिए पैसे की बजाय घडी गुल्लक में डाल रहा हूँ.
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शिक्षक : बताओ, सुरेश अगर हम समुद्र के पानी में एक लाल ईंट डालेंगे तो क्या होगा ?
सुरेश : ईंट भीग जाएगी.
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सुरेश और रमेश कई दिनों के बाद मिले. सुरेश का चेहरा बहोत चमकीला दिख रहा था इसलिए रमेश ने पूछा.
रमेश : यार सुरेश, तुम दिन में कितनी बार शेव करते हो ?
सुरेश : लगभग 25 से 30 बार
रमेश : 25 से 30 बार ? तुम पागल तो नहीं हो गए ?
सुरेश : पागल नहीं मैं हजाम हूँ.
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सुरेश अपने बेटे से..
सुरेश : बेटा, तुम्हारे क्लास में सबसे ज्यादा महेनती विद्यार्थी कौन है ?
बेटा : मैं खुद
सुरेश : वो कैसे ?
बेटा : जब पूरा क्लास पढ़ रहा होता है तब मैं लास्ट बेंच पर खड़ा होता हूँ.
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सुरेश नया नया कवि बना था और उसने ढेर सारी कविताएं भी लिख रखी थी.
सुरेश : यार रमेश, मैंने महेनत कर के ढेरों कविताएं लिखी थी लेकिन मेरे बच्चे ने पूरी किताब फाड़ डाली.
रमेश : क्या बात है ? तुम्हारे बच्चे को छोटी सी उम्र में कला की सही परख हो गई लगती है, समझदार है.
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